करेला के फायदे और औषधीय गुण – Benefits of Bitter Gourd

करेला के फायदे और औषधीय गुण

करेला हरी सब्जियों में गिने जाने वाला एक हरे रंग की सब्जी है। जिसमे मुलायम से छोटे छोटे कांटे होते है। ये स्वाद में जितना कडवा होता है उससे कई अधिक करेला के फायदे और औषधीय गुण है। इसके कड़वेपन के कारण अधिकतर लोग इसको खाना पसन्द नही करते है। पर शायद वो नहीं जानते की इसके जितने गुण शायद ही किसी और सब्जी मे पाया जाता है।

करेला के फायदे और औषधीय गुण

रसोई में सब्जी के अलावा इसका उपयोग कई बीमारियों में किया जाता है। मधुमेह रोगियों के लिए ये करेला एक रामबाण औषधि मानी जाती है। इसका प्रयोग कई दवाइयों को बनाने में किया जाता है। आयुर्वेद में करेले को अमृत के समान माना जाता है। ऐसा कहा जाता है जो इसका नियमित सेवन करता है वो कभी बीमार नहीं पड़ता बीमारी उससे कोसो दूर रहती है।

करेला के औषधीय गुण

भारत के विभिन्न प्रान्तों मे करेला को अलग अलग नामो से जाना जाता है। गुजराती में करला, मलयालम में पावकाका, बंगाली में कोरोला, कन्नड़ में हगालकई और मराठी में करले कहा जाता है। करेले मे एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा मे मिलता है। इसके अलावा प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, मैग्नीशियम, मैंगनीज, फोलेट, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी, फाइबर, लिनोलेनिक एसिड, ओलिक एसिड, कैरोटीन, बीटा कैरोटीन, आयरन, जिंक, पोटेशियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज पाए जाते है। इसमें कैलोरी बहुत कम होती है।

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कौन कौन सी बीमारी में करेला के फायदे है।

विभिन्न बीमारियों की एक औषधि है करेला। आप इसका सेवन नियमित करे नीचे लिखे निन्मलिखित बीमारियों में आपको फायदा होगा।

  • मधुमेह, बवासीर, श्वसन और त्वचा संबंधित रोगों के लिए करेला काफी फायदेमंद है।
  • करेला मे प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने का खास गुण मौजूद होते है।
  • कैंसर जैसी भयंकर बीमारी के लक्षणों को भी करेला रोक सकता है।
  • सूजन कम करने वाले, एंटीफंगल, एंटीबायोटिक, एंटी-एलर्जिक, एंटीवायरल और एंटीपारासिटिक जैसे तत्व करेले मे होते है।
  • करेला शरीर के जहरीले और हानिकारक तत्व को बाहर निकालने मे मदद करता है। इसका रस का सेवन रक्त शोधन के लिए किया जाता है।

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1. मधुमेह के लिये

मधुमेह मतलब शुगर के रोग मे करेलो को औषधि के रूप मे प्रयोग किया जाता है। इसमे एन्सुलित जैसा पदार्थ होता है, जो रक्त तथा मूत्र मे शर्करा का स्तर कम करता है। रोगी को चार – पाच करेले का रस निकालकर सुबह खाली पेट पीना चाहिये। करेलो के बीजो का पाउडर बनाकर भी भोजन के साथ लिया जा सकता है। मधुमेह के अधिकांश रोगियों की अधिकतर पोषक आवश्यकता पूरी नहीं होती है। ऐसे में रोगियों को खनिज और विटामिन से भरपूर करेले को अपने आहार में सम्मलित करना चाहिए। करेले के सेवन से शुगर रोगी को जरूरत की सभी पोषक तत्व की आवश्कता पूरी होती है।

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2. बवासीर के लिये

जब बवासीर हो तो उसमे करेले की पत्तियों का ताजा रस बवासीर मे बहुत ही लाभदायक है। मटठे के साथ करेले की पत्तियों का ताजा रस सुबह मे पिने से बवासीर ठीक हो जाता है।

3. रक्त विकार के लिये

जब किसी को रक्त विकार हो जाता है, तो उस समय उसको करेला का सेवन करना चाहिए। करेला का सेवन रक्त संबंधित बहुत सारी बीमारियों में फायदा पहुचाता है। जैसे – फोड़े, फुन्सियाँ, खुजली, दाद आदि को दूर करता है।

4. साँस विकार के लिये

सांस फूलने की बीमारी को दूर करने के लिये करेले के रस का इस्तेमाल करना लाभदायक रहता है। इसके रस के नियमित उपयोग से खांसी, जुकाम और दमे में बहुत आराम मिलता है।

5. हैजा के लिए

हैजा जीवाणु द्वारा दूषित भोजन या पानी का इस्तेमाल करने से होता है। हैजे की बीमारी में रोगी को उलटी और पतले दस्त होने लगती है। इलाज ना मिलने पर 18 घंटो के भीतर रोगी की म्रत्यु हो सकती है। इस बीमारी की प्राम्भिक अवस्था में करेले की पत्तियों का रस पिने से लाभ होता है। रोगी को करेले के रस में प्याज का रस और कुछ बूंदे नींबू का रस मिलाकर देना लाभदायक रहता है। ऐसा करने से उल्टी और दस्त रूक जाता है।

6. मलेरिया के लिये

जब किसी को मलेरिया होता है तो वह डॉक्टर के पास जाता है। अनुमान के मुताबिक मलेरिया बीमारी के इलाज का खर्चा 2 से 3 हजार रूपये हो जाता है। आप घर बैठे करेले के गुण का फायदा इस बीमारी के लिए उपयोग कर सकते है। “करेले का पत्ते और काली मिर्च पीसकर सेवन करने से मलेरिया ज्वर का नाश होता है, और आपका मलेरिया ठीक हो जाता है”।

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