नाक की झिल्ली का बढ़ना लक्षण, सिम्टम्स, कारण और उपचार Nasal Polyps Treatment

naak ki jhilli badhne ka upchar

अगर आपने कभी भी अपने नाक के अंदर अजीब सा टकराव मेहरुस किया है और हैरान है की ये क्या हो सकता है तो आपको ये ज़रूर पढ़ना चहाइए क्योकि हो सकता है कि आपको nasal polyps या nasal polyposis हो। जिसे नाक की झिल्ली का बढ़ना भी कहते हैं।

नैज़ल पोलिप्स ( nasal polyps ) आपको एक हद तक जलन कर सकता है पर आपकी ज़िंदगी को नुकसान नही पहुंचता क्योकि ये किसी भी तरह से खतरनाक नहीं है। बल्कि नेज़ल पोलिप्स से कैंसर नहीं होता और यह इतना सामान्य है कि तक़रीबन 4% अमेरिका की जनसंख्या इससे इस समय पीड़ित है।

अगर हम बात करे इसके पारंम्परिक तरीको की बात करे, तो स्टेरॉयड और एंटीथिस्टामिन्स उपलब्ध है। पर सर्जरी भी सुझाव है जब ये बेहसर लगते हो।

बहुत सारी परिस्थियो मे कुछ भी काम नहीं करता और एक से ज्यादा सर्जरी की जाती है। पर समस्या दुबारा आ जाती है। तथोये को जाने बिना, लोग चिंतित है और अपनी उम्मीद छोड़ना शुरू कर देते है सिर्फ नासल पोलिप्स का नाम सुन कर।

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नाक की झिल्ली का बढ़ना ( Nasal polyps ) लक्षण , सिम्टम्स , कारण और उपचार

सैभाग्य से सबसे भरोसेमंद आयुर्वेदिक तरीका हमारे पास मजूद है। नासल पोलिप्स के  उपचार का तरीका आयुर्वेद में सबसे असरदार है। इस समस्या से निजात पाने के लिए। ये वास्तव में बीमारी को जड़ से खत्म करता है इसतरह ये कभी वापिस नहीं आता है।

बाकी दवाईया इस बीमारी के कारणो पर सीधा असर नहीं करती और सिर्फ इसके लक्षणों को ही दूर करती है। आयुर्वेद विज्ञान है जो की बीमारी को ठीक करती है। तब तक यह सुधार करती है शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति में ताकि वो दुबारा लड़ सके बैक्टीरिया, वायरस या किसी भी कारणो से भविषय में। ताकि ये बीमारी कभी वापिस ना आये।

नेज़ल पोलिप्स असल में है क्या ?

ये नेज़ल पोलिप्स या सिनसेस में त्वचा का अतिरिक्त विकास है। ये समूह में भी हो सकते है और अगर सिर्फ एक नेज़ल पोलिप्स भी बड़ा हो जाये तो ये अक्सर नासल के रास्ते को रोक देते है और साँस लेना मुश्किल हो जाता है। हालांकि ,ये  कोमल ,बिना दर्द के और कैंसर मुक्त है बिलकुल जैसे एक आम त्वचा होती है।

कैसे पता करे की हमे नेज़ल पोलिप्स है ?

दो प्रकार के नाक पॉलीप्स मौजूद हैं। एक एंटर्रोचैनल पॉलीप्स है जो इतना आम नहीं है और मैक्सिलरी साइनस में उत्पन्न होता है। अन्य एक ethmoidal polyps है क्योंकि यह ethmoidal साइनस में उत्पन्न होता है।

हाँ, यह थोड़ा जटिल लगता है लेकिन आप चिंता मत करो! कुछ पहचानने योग्य संकेत हैं या आप नाक के पॉलीप्स के लक्षण कह सकते हैं जो आपको उपस्थिति के बारे में बताने के लिए पर्याप्त हैं।

पॉलीप्स असली में संवेदनशील नहीं हैं इसलिए उनकी उपस्थिति को पहचानना आसान नहीं है। लेकिन जब आपको इसकी समस्या होती है तो आप हमेशा ठंड महसूस करते हैं।

  • आपकी नाक भरी हुई और अवरुद्ध रहती है
  • अक्सर छींकना
  • नाक बहना
  • चेहरे का दर्द
  • गंध की भावना
  • आंखों के चारों ओर खुजली
  • संक्रमण
  • आवाज़ में परिवर्तन
  • माथे और चेहरे पर दबाव महसूस होना
  • सोते समय खर्राटें आना

नाक पॉलीप्स के कारण क्या हैं?

नाक की झिल्ली के बढ़ने का कोई विशेष कारण नहीं है। वास्तव में असली कारण अज्ञात हैं। ऐसा माना जाता है कि जिनको नेज़ल पोलिप्स नहीं होता है उनकी तुलना में पॉलीप्स विकसित करने वाले लोगों के पास अलग-अलग प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया होती है। यह एलर्जीय राइनाइटिस, अस्थमा, एस्पिरिन एलर्जी, साइनस संक्रमण, तीव्र और पुरानी संक्रमण और सिस्टिक फाइब्रोसिस से जुड़ा हुआ है।

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उन उपचारों पर आते हैं जो नाक की झिल्ली बढने पर आयुर्वेद घरेलू उपचार के रूप में हमारे पास मौजूद है : Nasal Polyps Treatment in Ayurveda and Home Remedies in Hindi

टी ट्री आयल :

टी ट्री आयल जब नाक के मार्ग में डाला जाता है तो यह काफी प्रभावी होता है। केवल एक समय में एक ही बूँद नाक में डालें । आंतरिक रूप से उपयोग न करें।

मैगनीशियम:

पत्तेदार हरी सब्जियां, नट, बीज और फलियां जैसे मैग्नीशियम में समृद्ध आहार एंटी-उत्तेजक गुणों से भरपूर है इस के कारण शरीर के ऊतकों को आराम मिलता है।

प्रोटीन उक्त भोजन:

चिकन, टर्की, लॉबस्टर, लाल मांस, काजू, सेम और पागल जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन और जिंक में समृद्ध होते हैं। जिंक ठंड, पुरानी साइनसिसिटिस, और नाक के पॉलीप्स के लिए एक प्राकृतिक सेनानी के रूप में काम करता है।

गोल्डनसील:

गोल्डनसील में एंटीबैक्टीरियल और एंटीमिक्राबियल गुण दोनों होते हैं। गोल्डनसील से बनी एक कप चाय पीने से नाक के ऊतक शांत होते हैं । इसे गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं प्रयोग न करें।

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ब्रोमलेन:

यह एक एंजाइम है जो अनानास रस से निकाला जाता है। आश्चर्यजनक रूप से ब्रोमेलेन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है। इसे अपनी जूस में जोड़ें या आप सीधा भी ले ले सकते हैं। यह एलर्जी और अस्थमा को भी रोकता है। और नाक की झिल्ली बढ़ने जैसी साइनस संक्रमण को कम करता है।

गहरी श्वास थेरेपी:

यह रक्तचाप को भी कम कर कर सकती है, और मन को शांति प्रदान करती है। यह श्वास अभ्यास मूल रूप से सुबह किया जा सकता है। गहरी सांस लेने से श्वसन में सुधार होता है जिससे श्वास में सुधार करने में मदद मिलती है।

नाक की सफाई:

हल्का गुनगुना नमक का पानी एक नाक में डाला जाता है, ताकि यह दूसरे नाक के माध्यम से बाहर  निकल जाए। यह नाक की पूर्णतः सफाई के लिए बहुत अच्छा है।

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Source by Dr. Satnam Singh

Bio: Dr. Satnam Singh is a Naturopath, Herbalist and he is an expert Ayurveda consultant. He has vast experience of herbs and their applied uses. He is CEO and Founder of Arogyam Allergy Centre in India and He has successfully treated numerous patients suffering from various ailments, throughout the world.

He has done his three-year degree from Gandhi Ashram Samalkha. He has been spending a lot of time in different Ashrams, i.e. hermitages where Gandhi’s natural style of living is promoted. He is a distinction holder in Pharmacological Sciences and a Yoga Therapist as well.

Area of Expertise: Ayurveda, Herbal Medicine, Natural Treatments

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